प्रधानमंत्री विश्वकर्मा टूलकिट योजना भारत के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना परंपरागत कारीगरों को आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने का एक सराहनीय प्रयास है। आइए जानें इस योजना के बारे में विस्तार से।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 73वें जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर 2023 को इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। सरकार ने इस योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 13,000 करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित किया है। यह योजना भारत के परंपरागत कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है कि देश के कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक औजारों से लैस करना। इसके तहत सरकार प्रत्येक पात्र लाभार्थी को 15,000 रुपये तक का ई-वाउचर प्रदान करेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी, जिससे वे अपने काम के लिए आवश्यक आधुनिक उपकरण खरीद सकें।
यह योजना 18 विभिन्न व्यवसायों के कारीगरों के लिए उपलब्ध है, जिनमें प्रमुख हैं:
• सुनार और मालाकार, जो भारतीय आभूषण परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं
• लोहार और कारपेंटर, जो निर्माण क्षेत्र की रीढ़ हैं
• कुम्हार और मूर्तिकार, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं
• दर्जी और मोची, जो रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करते हैं
• नाई और धोबी, जो समाज की अनिवार्य सेवाएं प्रदान करते हैं
इस योजना में केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल हैं:
• प्रत्येक लाभार्थी को एक विशेष पहचान पत्र और प्रमाण पत्र दिया जाएगा
• डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रति लेनदेन एक रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन
• प्रशिक्षण के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन का भत्ता
• आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण
योजना में आवेदन करने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाई गई है। आवेदक को सरकारी पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, और जाति प्रमाण पत्र शामिल हैं। आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए, और एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकता है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा टूलकिट योजना भारत के परंपरागत कारीगरों को आधुनिक युग में प्रतिस्पर्धी बनाने का एक सार्थक प्रयास है। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारेगी, बल्कि उन्हें डिजिटल युग में सक्षम भी बनाएगी। यह योजना भारत के कारीगरों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जो उन्हें आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगी।